Video 1 of one excerpt of a Satsanga held in Delhi on 25th Feb 2025.
(Regret the sound quality, recording done on mobile as Satsanga was conducted on a very short notice)
ओम् का मन में गुंजन
“कुछ समय बाद ओम् का स्मरण करो, एक दैदिप्यमान प्रकाश, ज्योति का स्मरण करो, उस प्रकाश को अपने शीर्ष में प्रवेश करो।
अनेकों बार मन ही मन में ओम् को बोलो, उसकी ऊर्जा को अपने चारों ओर फैलने दो। ओम् का मन में गुंजन – गान करो।
ओम् की तरंगें आकाश द्वारा विश्व में फैलेंगी, वे उन लोगों के मन में एक स्वर्णिम किरण अवश्य प्रदान करेंगी।
कभी न कभी एक मेरी ज्योति की किरण उस मनुष्य को मेरे पास आने की प्रेरणा अवश्य देगी। उसे ध्यान करने की इच्छा होगी।
विश्व में अशान्ति अशान्त मन द्वारा है। मन संसार भोग में लिप्त है। जितनी संसारिक इच्छाएँ बढ़ेंगी, उतनी मन में अशान्ति होगी।
ओम् का गुंजन आकाश में फैलाओ, उसकी ध्वनि धीरे-धीरे लोगों में परिवर्तन अवश्य लाएगी। ओम् का गुंजन तुम्हारे मन में सदा होता रहेगा, यह आज मेरा तुम्हें आशीर्वाद है !”


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